वोटिंग मशीन पर हैकिंग के गंभीर आरोप

May 22, 2014 2:21 pm

सवाल यह नहीं है कि लोकसभा चुनाव का नतीजा किसी EVM हैक के कारण आया है या नहीं, बल्कि इस ओर ईशारा करना है कि कई लोगो के द्वारा यह दावा किया गया है कि EVM आसानी से और एक साथ बड़ी तादाद में हैक हो सकती हैं। इस तरह के दावों के बाद सोशल मीडिया पर यह बात ज़ोर से उठ रही है कि मतदान की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए, जिससे कि वोटर को पता चल सके कि उसका वोट उसके पसंद के प्रत्याशी को ही मिला है या नहीं। साथ ही साथ आम जनता को यह जानने का भी अधिकार है कि EVM पर चुनाव से पहले और बाद में आयोग किस तरह की सिक्योरिटी अपनाता है।

EVM_Pic_at_Facebookसोशल साइट्स पर आजकल कुछ फोटो लगातार शेयर्स की जा रही हैं, जिसमें किसी तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता के द्वारा फेसबुक पर एक फोटो पोस्ट की गई है। वह अपने घर पर चुनाव से पहले EVM मशीन के साथ दिखाई दे रहा है और उसके मित्र उससे बूथ कैप्चरिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर बात करते दिखाई दे रहे हैं।
इस फोटो पर फेसबुक पर पठान परवेज़ लिखते हैं कि
क्या हम चुनाव से ठीक एक दिन पहले EVM को अपने घर ला सकते हैं? यहाँ इस फोटो में एक भाजपा सपोर्टर EVM के साथ अपने घर पर दिखाई दे रहा है। वाराणसी में प्रयोग होने वाली EVM में 42 उम्मीदवार और एक नोटा को मिलकर टोटल 43 बटन होने चाहिए, जो कि फोटो में दिखाई भी दे रहे हैं।
आपसे अनुरोध है कि इस फोटो को इलेक्शन कमीशन को फॉरवर्ड करें, जिससे कि सत्यता की जाँच हो सके. यह एक बड़ा फ्रॉड दिखाई दे रहा है, अगर सच हुआ तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
इसी फोटो पर समीर लिखते हैं: बीजेपी समर्थको द्वारा इस तरह की फोटो अपलोड की जा रही है। मै सभी राजनितिक दलों और चुनाव आयोग से यह जवाब चाहूँगा कि वो इस तरह की खबर पता लगने के बाद भी शांत क्यों बैठा है? चाहे कुछ भी है, चुनाव आयोग को इसका जवाब देना पड़ेंगा की सरकारी मशीन किसी पार्टी विशेष के कार्यकर्ता के घर कैसे जा सकती है। क्या इसमें चुनाव आयोग भी मिला हुआ है? EVM हैकिंग के विषय पर चुनाव से पहले ही 5 अप्रेल को मैंने शबनम हाशमी की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का ज़िक्र करते हुए फेसबुक पर स्टेटस लिखा था:
क्या इलेक्शन कमीशन की राजनैतिक दलों से हैक हो सकने वाली वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर कोई सेटिंग हो सकती है? यह सवाल खड़ा किया है शबनम हाशमी ने। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले खुद चुनाव आयोग ने ईवीएम हैकिंग को पकड़ा है, जहां किसी भी बटन को दबाने पर वोट भाजपा के खाते में ही गया था, मगर इसके बावजूद कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। उन्होंने एक फिल्म के द्वारा समझाया कि कैसे ईवीएम की मॉस हैकिंग की जा सकती है, मतलब एक साथ हज़ारों मशीनों से मन-पसंद वोट डलवाए जा सकते हैं।
उन्होंने बैलेट पेपर्स के द्वारा चुनाव कराए जाने की मांग की, जिससे कि वोट करने वाले को पता रहे कि उसका वोट किस प्रत्याशी को पड़ा। इस मुद्दे पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए शबनम हाशमी।
इस बीच हरियाणा और महाराष्ट्र जैसी कई जगहों से भी यह खबरे आईं की EVM पर कोई भी बटन दबाने से एक ही उम्मीदवार को वोट डल रहे हैं। इस तरह के विमर्श और फोटो आने के बाद चुनाव आयोग से यह जानना आवश्यक हो गया है कि पार्टी विशेष के कार्यवाकर्ताओं के इस तरह के फोटो पर जाँच क्यों नहीं हुई? और अगर हुई तो क्या हुई?
यहाँ एक बिंदु यह भी उभर के आता है किहै यह सूचना वोट की गोपनीयता के नियम के भी खिलाफ है कि लोकसभा चुनाव में ब्लॉक / कॉलोनी स्तर अथवा विधानसभा स्तर पर किस पार्टी को कितने मत मिले। बैलेट पेपर्स में गिनती से पहले सारे बैलेट्स को मिलाया जाता था, जिससे कि क्षेत्रवार नतीजा पता नहीं चल पाएं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। अगर चुनाव लोकसभा का है तो उम्मीदवारों को जानकारी केवल लोकसभा क्षेत्र के स्तर पर ही मिलनी चाहिए, जिससे कि जीतने के बाद सांसद किसी क्षेत्र विशेष के साथ दुर्भावना से काम अथवा किसी तरह का पक्षपात नहीं कर सके।
Tags:

Facebook Comments