हज यात्रा में ‘घोटाले’ पर विदेश मंत्रालय और हज कमेटी की चुप्पी

July 21, 2014 7:32 pm

नई दिल्ली। सालाना हज यात्रा में 600 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट को विदेश मंत्रालय और केंद्रीय हज कमेटी के जवाब का इंतज़ार है। एक जनहित याचिका की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने पांच महीने पहले इन पक्षों से जवाब मांगा था।

खुद्दाम-उल हज-ओ-उमरा फाउंडेशन ने इस घोटाले के आरोप लगाए हैं। फाउंडेशन के मुताबिक प्रत्येक हज यात्री से 75 हज़ार रुपये की अवैध अग्रिम राशि ली जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल पहले आदेश दिया था कि हज यात्रियों को सऊदी अरब ले जाने के वास्ते कम से कम राशि के लिए दुनिया भर से एयरलाइंस टेंडर लिए जाने चाहिएं। जिस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है।

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फाउंडेशन के आरोप के मुताबिक टेंडर जारी ना किए जाने की वजह से सऊदी एयरलाइंस और एयर इंडिया के अलावा भारत के हज यात्रियों के पास और कोई विकल्प नहीं है और ये सब हज कमेटी के साथ साठगांठ की वजह से हो रहा है। फाउंडेशन ने इस मामले की जांच सीएजी से भी कराने की मांग की है।

फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि अगर किसी भारतीय नागरिक को किसी देश से वीज़ा प्राप्त हो जाता है तो वो किसी भी एजेंसी से विदेशी मुद्रा खरीदने के लिए स्वतंत्र होता है। लेकिन हज कमेटी हज यात्रियों को पैनल से सऊदी रियाल खरीदने के लिए मजबूर करती है।पिछली यूपीए सरकार इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से बचती रही। नई एनडीए सरकार का रुख क्या रहता है ये आठ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान स्पष्ट हो सकता है।

अगस्त में होने वाली हज यात्रा के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार करीब पौने दो लाख भारतीय नागरिक हज यात्रा के लिए मक्का जाएंगे।

23 जून को आल इंडिया हज सालाना कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने माना था कि हज यात्रियों के लिए बंदोबस्त में खामियां रही हैं। उन्होंने सुविधाओं को बेहतर बनाने का वादा भी किया था। सुषमा स्वराज ने श्रीनगर से हज पर जाने वाले यात्रियों से टिकट के लिए 1.54 लाख रुपये चार्ज करने के लिए एयर इंडिया की आलोचना भी की। जबकि दूसरी जगहों से 62,800 रुपये ही लिए जाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार विदेश मंत्रालय और हज कमेटी को इस साल 24 फरवरी को पहली बार नोटिस भेजे थे। हज पैनल पर कुप्रबंधन और खामियों के आरोपों को लेकर चार हफ्ते में सभी पक्षों से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा था। लेकिन पिछली दो सुनवाई में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इसकी वजह से सुनवाई को स्थगित करना पड़ा था।

हज यात्रियों की बेहतरी के लिए फाउंडेशन की क्या मांगें हैं?

– हज यात्रियों के वित्तीय पहलुओं की सीएजी से जांच हो

– हज यात्रियों से अग्रिम राशि लेना बंद किया जाए। इससे जो ब्याज हज कमेटी को मिलता है वो अवैध और गैर-इस्लामी है।

– मौजूदा हज कमेटी को भंग कर नई कमेटी बनाई जाए। इसमें जनता से भी नुमाइंदे लिए जाएं। इसके लिए मुस्लिम समुदाय से सुझाव मांगे जाए।

– हज यात्रा के लिए ग्लोबल एयरलाइन टेंडर मांगे जाए। सऊदी एयरलाइंस और एयर इंडिया से यात्रा बहुत महंगी है।

– सारे आरोपों की जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष कमेटी से कराई जाए।

(स्रोत- मेल टुडे)

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