सिगरेट से कैंसर होने के क्या सबूत है: सुप्रीम कोर्ट

March 9, 2016 10:35 am

नई दिल्ली! सिगरेट के डिब्बों को अनाकर्षक बनाने के लिए बेरंग करने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या कोई ठोस सबूत है जो बताए कि सिगरेट पीने से कैंसर होता है। क्या धूम्रपान से कैंसर होने की बात को निश्चित तौर पर कहा जा सकता है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टी. एस. ठाकुर और यू. यू. ललित की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ऐश्वर्या भाटी से सवाल किया कि आप इसे कैसे साबित करेंगे कि सिगरेट पीने से कैंसर होता है? कई लोग ध्रूमपान नहीं करते, लेकिन उन्हें कैंसर हो जाता है। और कई लोग ऐसे हैं जो सिगरेट पीते हैं, लेकिन पूरी जिंदगी जीये और आखिर तक स्वस्थ रहे।

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इलाहाबाद में रहने वाले 66 वर्षीय वकील उमेश नारायण शर्मा द्वारा दायर याचिका पर पर इस टिप्पणी के बाद खंडपीठ ने केंद्र से जवाब मांगा है। वह खुद गुटखा खाने और सिगरेट पीने के आदी है, उन्हें जीभ का और मुंह का कैंसर हो गया है और मुंबई के एक अस्पताल में उनका इलाज हो रहा है। उमेश का कहना है कि एक अनुमान के मुताबिक साल 2020 तक सिगरेट पीने और तंबाकू के सेवन से दुनिया भर में लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो जाएगी।

याचिका में कहा गया है कि भारत में युवाओं और बच्चों के बीच तंबाकू काफी इस्तेमाल हो रहा है। दुनिया भर में तंबाकू का सेवन करने वाले व्यस्कों के सर्वे के मुताबिक भारत में 15 साल और इससे ऊपर के लगभग 35 फीसद लोग, यानी लगभग 28 करोड़ आबादी किसी ना किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रही है। इनमें से ज्यादातर या तो बिल्कुल भी पढ़े-लिखे नहीं हैं, या फिर बहुत कम पढ़े हैं।

याचिकाकर्ता के मुताबित मौजूदा समय में तंबाकू के उत्पाद काफी आकर्षक पैकेटों में आते हैं। इससे युवा उनका सेवन करने के लिे आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे पैकिंग के कारण लोग सेहत के लिए लिखी चेतावनी को भी नजरंदाज कर देते हैं। इससे निपटने के लिए तंबाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को सादे तरीके से पैकिंग करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। सादी पैकिंग और बड़ी चेतावनी के कारण लोग ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल ना करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

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