नौकरशाहों की सियासत

January 24, 2014 6:56 pm

rksinghकरीब छह महीने पहले तक देश के गृह सचिव रहे आर के सिंह अब एक राष्ट्रीय पार्टी के नेता हैं…उन्होंने देश के गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे पर सनसनीखेज़ आरोप लगाए हैं…मसलन शिंदे ने देश के दुश्मन नंबर वन दाऊद इब्राहिम के एक करीबी बिजनेसमैन को दिल्ली पुलिस से बचाया था…पुलिस के काम में दखलअंदाज़ी के आरोपों के अलावा आर के सिंह ने शिंदे के इस बयान की भी हवा निकाल दी कि दाऊद को अमेरिकी खुफ़िया एजेंसी एफबीआई की मदद से भारत लाने की कोशिश की जा रही है…

शिंदे का गृह मंत्री के तौर पर कामकाज कैसा रहा है, सब जानते हैं…कभी बॉलीवुड में म्यूज़िक रिलीज पार्टी में शिरकत करना और कभी कांग्रेसी नेता होने के बावजूद शरद पवार को प्रधानमंत्री बनता देखने की इच्छा जताना…शिंदे इस तरह के आचरण से ज़्यादा सुर्खियों में रहे हैं बनिस्बत गृह मंत्री के तौर पर अपने प्रदर्शन की वजह से…

शिंदे तो खैर शिंदे हैं…लेकिन यहां मेरा सवाल दूसरा है…ये नौकरशाहों से संबंधित हैं…ये नौकरशाह जब पद पर होते हैं तो क्यों मंत्रियों की गलत हरकतों का विरोध नहीं कर पाते…पद छोड़ने के बाद ही उन्हें ये सब क्यों याद आता है…सवाल ये भी है कि नौकरशाहों को रिटायर होने के बाद कॉरपोरेट घरानों की नौकरी या राजनीतिक दलों का सदस्य बनने की इजाज़त क्यों दी जाती है…क्या गोपनीयता के नियम इन पर लागू नहीं होते…क्या पद पर रहते हुए मिली जानकारियों का रिटायर होने के बाद गलत उपयोग नहीं हो सकता…

लोकसभा चुनाव आने वाले हैं…ऐसे में नौकरशाहों, पुलिस अफसरों का राजनीतिक दलों का दामन थामने का सिलसिला शुरू हो चुका है…सूत्रों के मुताबिक हरियाणा के पूर्व महानिदेशक (सीआईडी) परमवीर राठी सोनीपत लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे…राठी अभी मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सलाहकार हैं…ऐसी जानकारी है कि राठी ने सरकारी पद पर रहते हुए अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है…राठी अपने पुलिस कार्यकाल के दौरान हुड्डा सरकार के सबसे ताकतवर अफसर माने जाते थे…हुड्डा से उनकी नज़दीकी का ही नतीजा है कि बाद में उनकी सलाहकार के तौर पर भी सेवाएं ली जाती रहीं…राठी पर सलाहकार के नाते पुलिस विभाग को रिमोट कंट्रोल से चलाने के आरोप भी लगते रहे हैं…

पुलिस अफसरों को रिटायर होने के बाद सत्ता का चस्का लगना नई बात नहीं है…हरियाणा कैडर के वी एन राय और रणबीर शर्मा आम आदमी पार्टी में शामिल हो चुके हैं…दोनों की नज़र करनाल लोकसभा सीट से ‘आप’ का उम्मीदवार बनने पर हैं…हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक अजीत सिंह भाटोटिया भी ‘आप’ के दरवाजे पर खड़े हैं…उनका भी दावा है कि वे जनता की सेवा करना चाहते हैं…ये नौकरशाह सत्ता में आने के बाद अपने लिए कौन सा मेवा चाहते हैं, इस पर अपनी ज़ुबान सिले ही रखते हैं… नौकरशाहों की सियासतलेकिन साहब ये जो पब्लिक है, सब जानती है…


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