RSS सर्वे के अनुसार भाजपा गुजरात में 60-65 सीटों पर सिमट जाएगी

August 3, 2016 11:46 am

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुताबिक अगर इस समय गुजरात में विधानसभा चुनाव कराए जाते हैं तो भाजपा को 182 में से 60-65 सीटें मिलेंगी। यह बात भाजपा और आरएसएस के एक सर्वे से निकल कर सामने आई है। यह सर्वे गुजरात में फैले दलित आंदोलन के बाद किया गया है। ज्ञात रहे कि ऊना में मृत गाय की खाल उतारने पर दलित युवकों की पिटाई के विरोध में गुजरात में दो हफ्तों से दलित प्रदर्शन कर रहे हैं।

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इस सर्वे को आरएसएस के उन जमीनी प्रचारकों ने अंजाम दिया है, जिन्हें लोगों से फीडबैक लेने का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा की ओर बताया गया है तो कहा गया है दलित इससे दूर जा रहे हैं। मिडिया सूत्रों के अनुसार गुजरात आरएसएस के शीर्ष नेताओं ने सोमवार को मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल को सर्वे के बारे में बताकर इस्तीफे के लिए राजी कर लिया था। यही वजह है कि विपक्ष के नेता शंकरसिंह वाघेला ने मंगलवार को भरोसा जताया था कि अगर चुनाव जल्दी भी होते हैं तो उनकी पार्टी इसके लिए तैयार है। वाघेला कांग्रेस में जाने से पहले आरएसएस के प्रचारक और भाजपा के बड़े नेता रह चुके हैं।

सर्वे में कहा गया है कि आदिवासी भी सरकारी नौकरियों और जमीन आवंटन के लिए आंदोलन छेड़ सकते हैं। सर्वे से पता चलता है कि दलित और पाटीदार आंदोलन के चलते भाजपा को कम से कम 18 विधानसभा सीटों पर नुकसान होने जा रहा है। इससे पहले आरएसएस की एक और रिपोर्ट में कहा गया था कि भाजपा को दिसंबर 2015 के पंचायती चुनावों में कम से कम 104 सीटों का नुकसान हुआ। इसकी वजह पाटीदारों का आंदोलन था। भाजपा को शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में ज्यादा नुकसान हुआ था।

आरएसएस सूत्रों के मुताबिक संघ दलितों को हिन्दू समुदाय के महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए समुदाय को दो ध्रुव बंटना कभी स्वीकार नहीं करेगा। पहले दलित कांग्रेस के प्रति समर्पित थे और संघ ने दो दशकों की अथक मेहनत के बाद उन्हें अपने साथ किया था। इससे निपटने के लिए पहला कदम आनंदीबेन को कुर्सी से हटने के लिए तैयार करना था अब इसके बाद दूसरे कदम उठाना है।

संघ ने दलितों के हिंदुओं से दूर जाने को गंभीरता से ले रहा है, इसलिए यह पहली बार सामाजिक सद्भावना सम्मेलन करने जा रहा है। यह सम्मेलन बुधवार को ऊना में आयोजित किया जाएगा, जहां से दलितों का विरोध शुरू हुआ था। गुजरात आरएसएस के प्रभारी विजय ठाकर का कहना है, ‘हम गुजरात में सामाजिक सद्भावना लाने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए धार्मिक उपदेशक और संत सबसे सशक्त माध्यम हैं।’ हालांकि सर्वे के बाद आनंदीबेन के मुख्यमंत्री पद से हटने पर उन्होंने कहा कि आरएसएस इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त नहीं रहता है, इसके लिए भाजपा का संगठन है।


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